चित्तौड़गढ़ में घूमने की जगह | Best Places To Visit In Chittorgarh
चित्तौड़गढ़, राजस्थान के गौरवशाली इतिहास का सबसे प्रभावशाली अध्याय लिखने वाला यह स्थान, न केवल एक पर्यटन स्थल है, बल्कि वीरता, बलिदान और अदम्य साहस की जीवंत गाथा है। मेवाड़ की इस ऐतिहासिक राजधानी में हर पत्थर शौर्य की कहानी बयां करता है। यदि आप इतिहास, वास्तुकला और संस्कृति के प्रेमी हैं, तो चित्तौड़गढ़ में घूमने की जगह आपके लिए एक अद्वितीय अनुभव प्रस्तुत करती हैं। आइए, इस गौरवशाली नगरी के शीर्ष 10 आकर्षणों की यात्रा पर चलते हैं।
Table of Contents
1. चित्तौड़गढ़ किला: गौरव और बलिदान का प्रतीक
चित्तौड़गढ़ किला न केवल भारत बल्कि एशिया के सबसे बड़े किलों में से एक है। 700 एकड़ में फैले इस किले का निर्माण 7वीं शताब्दी में मौर्य वंश के शासक चित्रांगद मौर्य ने करवाया था। यह चित्तौड़गढ़ में घूमने की जगह का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है। किले की परिधि लगभग 13 किलोमीटर है और इसमें सात विशाल प्रवेश द्वार हैं।
वास्तुकला शैली:
- किले की वास्तुकला में राजपूत और हिंदू शैली की झलक स्पष्ट दिखती है।
- विशाल प्राचीर, भव्य प्रवेश द्वार (जैसे पद्मन पोल, भैरव पोल)
- और अंदर के स्मारक राजपूत स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
विशेष संस्कृति:
- यह किला राजपूताना शौर्य, “जौहर” की परंपरा और देशभक्ति की भावना का प्रतीक है।
- यहाँ का इतिहास रानी पद्मिनी, महाराणा प्रताप और मीरा बाई जैसे महान व्यक्तित्वों की गाथाओं से जुड़ा है।
कब जाएँ:
- अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त है, क्योंकि मौसम सुहावना रहता है।
- सूर्योदय और सूर्यास्त के समय किले का नज़ारा अद्भुत होता है।
कैसे जाएँ:
- किला शहर से लगभग 5 किमी दूर एक पहाड़ी पर स्थित है।
- आप टैक्सी, ऑटो-रिक्शा या निजी वाहन से यहाँ पहुँच सकते हैं। पैदल चढ़ाई भी एक रोमांचक अनुभव है।
क्या करें:
- विजय स्तम्भ और कीर्ति स्तम्भ देखें, किले के अंदर स्थित मंदिरों में दर्शन करें,
- और साउंड एंड लाइट शो से किले के इतिहास की गाथा सुनें।
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2. कीर्ति स्तम्भ: जैन धर्म की विरासत
विजय स्तम्भ से छोटा, लेकिन उतना ही महत्वपूर्ण, कीर्ति स्तम्भ भी किले के परिसर में ही स्थित है। इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में एक जैन व्यापारी ने करवाया था। यह चित्तौड़गढ़ में घूमने की जगह है जो धार्मिक सहिष्णुता और जैन वास्तुकला की भव्यता को दर्शाती है।
वास्तुकला शैली:
यह स्तम्भ जैन वास्तुकला शैली में बना हुआ है। इसमें विभिन्न जैन तीर्थंकरों की सुंदर प्रतिमाएँ उकेरी गई हैं और यह डिलवाड़ा मंदिरों की याद दिलाता है।
विशेष संस्कृति:
यह स्तम्भ उस समय की व्यापारिक समृद्धि और जैन समुदाय की धार्मिक आस्था का प्रतीक है। यह चित्तौड़गढ़ की बहुलतावादी संस्कृति को दर्शाता है।
क्या करें:
- स्तम्भ की नक्काशी का अवलोकन करें,
- आस-पास के जैन मंदिरों को देखें और इसके ऐतिहासिक महत्व को समझें।
कब जाएँ:
- दिन के उजाले में जाएँ ताकि स्तम्भ पर बनी जैन तीर्थंकरों की मूर्तियों को स्पष्ट देख सकें।
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3. विजय स्तम्भ: विजय का अमर स्तंभ
चित्तौड़गढ़ किले के भीतर स्थित विजय स्तम्भ एक अद्भुत स्मारक है। इस 9 मंजिला स्तंभ का निर्माण 1448 ईस्वी में महाराणा कुंभा ने मालवा और गुजरात के सुल्तानों पर विजय के उपलक्ष्य में करवाया था। यह चित्तौड़गढ़ में घूमने की जगह में सबसे प्रभावशाली ऐतिहासिक इमारतों में से एक है।
वास्तुकला शैली:
- यह स्तंभ भारतीय-हिंदू वास्तुकला का एक उत्कृष्ट नमूना है।
- पूरा स्तंभ देवी-देवताओं, योद्धाओं, नृत्यांगनाओं और
- पौराणिक कथाओं की सुन्दर मूर्तियों और नक्काशी से सजा हुआ है।
विशेष संस्कृति:
- विजय स्तम्भ महाराणा कुंभा की शक्ति और कला-संस्कृति के प्रति उनके प्रेम का प्रतीक है।
- यह न केवल एक सैन्य विजय बल्कि सांस्कृतिक उत्कर्ष का भी प्रतीक है।
क्या करें:
- स्तम्भ की बारीक नक्काशी को निहारें, इसकी मंजिलों पर चढ़कर चारों ओर का मनोरम दृश्य देखें।
- (हालाँकि अब चढ़ाई प्रतिबंधित हो सकती है, स्थानीय निर्देशों का पालन करें) और इसके इतिहास के बारे में जानें।
कब जाएँ:
- सुबह का समय सबसे अच्छा रहता है, जब सूरज की रोशनी स्तम्भ की नक्काशी पर पड़ती है।
- और वह और भी खूबसूरत दिखता है।
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4. पद्मिनी का महल और जल महल: प्रेम और बलिदान की कथा
यह स्थान रानी पद्मिनी की कथा से जुड़ा हुआ है। पद्मिनी का महल एक तीन मंजिला इमारत है जिसके सामने एक सुंदर जलाशय (जल महल) है। कहा जाता है कि अलाउद्दीन खिलजी ने इसी जलाशय में रानी पद्मिनी का प्रतिबिंब देखा था। यह एक महत्वपूर्ण चित्तौड़गढ़ में घूमने की जगह है।
वास्तुकला शैली:
- महल की वास्तुकला में राजपूत शैली के साथ जल संग्रहण की अभिनव प्रणाली देखी जा सकती है।
- जल महल एक सुंदर उदाहरण है कि कैसे स्थापत्य में प्राकृतिक तत्वों को समाहित किया जाता था।
विशेष संस्कृति:
- यह स्थान राजपूत नारी के सम्मान, स्वाभिमान और बलिदान की अमर गाथा से जुड़ा है।
- रानी पद्मिनी की कहानी भारतीय इतिहास और लोककथाओं का एक अटूट हिस्सा है।
क्या करें:
- महल की वास्तुकला को देखें, जल महल में पानी में परछाइयों का नज़ारा लें।
- और रानी पद्मिनी की वीरता और बलिदान की कहानी को याद करें।
कब जाएँ:
- शाम का समय विशेष रूप से सुहावना लगता है।
- जब जल महल में पानी का शांत दृश्य मन को शांति देता है।
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5. राणा कुंभा का महल: राजसी ऐश्वर्य के अवशेष
यह महल महाराणा कुंभा का निवास स्थान था और किले के अंदर स्थित सबसे बड़े महलों में से एक है। यहाँ से पद्मिनी महल और अन्य इमारतों का सुंदर दृश्य दिखाई देता है। यह निश्चित रूप से चित्तौड़गढ़ में घूमने की जगह की सूची में शामिल होना चाहिए।
वास्तुकला शैली:
- महल में राजपूत शैली के साथ-साथ इस्लामिक वास्तुकला के तत्व भी देखे जा सकते हैं।
- जो उस समय की सांस्कृतिक अंतर्क्रिया को दर्शाता है।
- महल में बड़े हॉल, बरामदे और सजावटी स्तंभ मौजूद हैं।
विशेष संस्कृति:
- यह महल राजपूत राजाओं के राजसी जीवन और उनकी प्रशासनिक व्यवस्था का केंद्र था।
- यहाँ से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाएँ चित्तौड़ के इतिहास का अहम हिस्सा हैं।
क्या करें:
- महल के भग्नावशेषों में घूमें, यहाँ के सुंदर दृश्यों का आनंद लें।
- और कुंभा के शासनकाल की कल्पना करने का प्रयास करें।
कब जाएँ:
- दोपहर से पहले का समय अच्छा रहता है।
- इस महल के खंडहरों के बीच घूमते हुए इतिहास की अनुभूति होती है।
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6. समिधेश्वर महादेव मंदिर: शिव भक्ति का केंद्र
चित्तौड़गढ़ किले से बाहर शहर में स्थित यह प्राचीन मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इसका निर्माण 11वीं शताब्दी में हुआ था और बाद में महाराणा कुंभा ने इसका जीर्णोद्धार करवाया। यह चित्तौड़गढ़ में घूमने की जगह है जो धार्मिक और पुरातात्विक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
वास्तुकला शैली:
- मंदिर नागर शैली में बना हुआ है और इसके स्तंभों, छत और शिखर पर अत्यंत जटिल और सुंदर नक्काशी की गई है।
- यह मंदिर मध्यकालीन भारतीय मंदिर वास्तुकला का एक शानदार उदाहरण है।
विशेष संस्कृति:
- यह मंदिर शहर के धार्मिक जीवन का केंद्र है।
- और स्थानीय लोगों की गहरी आस्था से जुड़ा हुआ है।
क्या करें:
- मंदिर के शिखर और स्तंभों पर की गई अद्भुत नक्काशी देखें।
- शिवलिंग के दर्शन करें और मंदिर की शांत वातावरण का आनंद लें।
कब जाएँ:
महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ बहुत बड़ा मेला लगता है, जो देखने लायक होता है। सामान्य दिनों में भी दर्शन किए जा सकते हैं।
7. मीरा बाई का मंदिर: भक्ति की अलौकिक धुन
मीराबाई, भगवान कृष्ण की परम भक्त और राजस्थान की संत कवयित्री, का यह मंदिर चित्तौड़गढ़ किले के अंदर स्थित है। ऐसा माना जाता है कि मीरा बाई यहाँ भजन-कीर्तन किया करती थीं। यह चित्तौड़गढ़ में घूमने की जगह आध्यात्मिक शांति और भक्ति भाव के लिए प्रसिद्ध है।
वास्तुकला शैली:
- मंदिर एक साधारण लेकिन भव्य राजपूत शैली में बना हुआ है।
- यह मंदिर अधिक विशाल न होकर आत्मीयता का भाव लिए हुए है।
विशेष संस्कृति:
- यह मंदिर भक्ति आंदोलन और राजस्थान की सांस्कृतिक-धार्मिक विरासत का प्रतिनिधित्व करता है।
- मीरा बाई की कविताएँ और गीत आज भी लोकप्रिय हैं।
क्या करें:
- मंदिर में दर्शन करें, मीरा बाई के भजनों को याद करें।
- और उनकी समर्पित जीवन यात्रा के बारे में जानें।
कब जाएँ:
- सुबह या शाम का समय जब आरती होती है, विशेष रूप से शुभ होता है।
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8. बस्सी वन्यजीव अभयारण्य: प्रकृति की गोद में
यदि आप ऐतिहासिक स्थलों के अलावा प्रकृति का आनंद भी लेना चाहते हैं, तो चित्तौड़गढ़ से लगभग 5 किमी दूर स्थित बस्सी वन्यजीव अभयारण्य एक उत्तम विकल्प है। यह एक सुंदर चित्तौड़गढ़ में घूमने की जगह है।
विशेष संस्कृति:
- यह अभयारण्य स्थानीय पर्यावरण संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र में वन्यजीवों के महत्व को दर्शाता है।
- आसपास के गाँवों की संस्कृति भी देखी जा सकती है।
क्या करें:
- जंगल सफारी का आनंद लें, पक्षियों को देखें (बर्ड वॉचिंग), और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लें।
- यहाँ तेंदुआ, हिरण, सांभर, लंगूर आदि जानवर देखे जा सकते हैं।
कब जाएँ:
- नवंबर से जून तक का समय वन्यजीव देखने के लिए अच्छा माना जाता है।
कैसे जाएँ:
- चित्तौड़गढ़ शहर से टैक्सी या निजी वाहन द्वारा आसानी से पहुँच सकते हैं।
9. गौमुख कुंड और कलिका माता मंदिर
किले के दक्षिणी छोर पर स्थित गौमुख कुंड एक प्राकृतिक जल स्रोत है जो गौ (गाय) के मुख के आकार का है। इसके ठीक ऊपर कलिका माता का मंदिर स्थित है। यह स्थान चित्तौड़गढ़ में घूमने की जगह के रूप में धार्मिक और प्राकृतिक दोनों तरह का अनुभव देता है।
वास्तुकला शैली:
- कुंड प्राकृतिक चट्टानों को काटकर बनाया गया है।
- मंदिर साधारण शैली में बना हुआ है, लेकिन देवी की मूर्ति प्रभावशाली है।
विशेष संस्कृति:
- यह स्थान शक्ति की उपासना और प्रकृति के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है।
- गौमुख कुंड किले के लिए पानी का एक महत्वपूर्ण स्रोत हुआ करता था।
क्या करें:
- गौमुख कुंड के पवित्र जल को देखें, कलिका माता के मंदिर में दर्शन करें।
- और आसपास के शांत वातावरण में कुछ समय बिताएँ।
कब जाएँ:
- नवरात्रि के समय यहाँ विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है।
- साल भर दर्शन किए जा सकते हैं।
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10. भैरव पोल और पद्मन पोल: किले के गौरवशाली प्रवेश द्वार
चित्तौड़गढ़ किले के सात प्रवेश द्वारों में भैरव पोल और पद्मन पोल सबसे महत्वपूर्ण हैं। ये द्वार न केवल सैन्य वास्तुकला के उदाहरण हैं बल्कि इनसे जुड़े इतिहास भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। ये चित्तौड़गढ़ में घूमने की जगह के रूप में किले के अनुभव को पूरा करते हैं।
वास्तुकला शैली:
- ये द्वार सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाए गए थे।
- इनकी मोटी दीवारें, ऊँचाई और रक्षात्मक संरचना राजपूत सैन्य वास्तुकला का बेहतरीन नमूना हैं।
विशेष संस्कृति:
- हर द्वार एक विशिष्ट ऐतिहासिक घटना से जुड़ा हुआ है।
- पद्मन पोल से जुड़ा 1568 का जौहर और भैरव पोल से जुड़ा राणा कुंभा का इतिहास यहाँ की वीर संस्कृति को दर्शाता है।
क्या करें:
- द्वारों की विशाल संरचना और मजबूती को देखें, इन पर बनी नक्काशी को निहारें
- और इनके नामों के पीछे के इतिहास को जानें।
कब जाएँ:
- किले में प्रवेश करते समय इन द्वारों को ध्यान से देखें।
- सुबह का समय फोटोग्राफी के लिए अच्छा होता है।
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निष्कर्ष:
चित्तौड़गढ़ केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि एक भावनात्मक यात्रा है। यहाँ का हर कण इतिहास बोलता है। यह नगरी आपको वीरता के साथ-साथ प्रेम, भक्ति और बलिदान की अमर कहानियाँ सुनाती है। प्रत्येक चित्तौड़गढ़ में घूमने की जगह एक नया रहस्य और एक नया अनुभव लेकर आती है। चाहे आप इतिहास के ज्ञानी हों, वास्तुकला के प्रेमी हों, या फिर आध्यात्मिक शांति की तलाश में हों, चित्तौड़गढ़ आपके लिए कुछ न कुछ अवश्य रखता है। इसलिए अगली यात्रा की योजना बनाएँ और स्वयं इस ऐतिहासिक धरोहर के जादू में खो जाएँ।
चित्तौड़गढ़ यात्रा से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त है, क्योंकि मौसम सुहावना और ठंडा रहता है।
पूरे किले को अच्छे से देखने के लिए कम से कम 4-5 घंटे का समय दें।
नज़दीकी हवाई अड्डा उदयपुर (लगभग 100 किमी) है। रेल और सड़क मार्ग से भी अच्छी कनेक्टिविटी है।
चित्तौड़गढ़ दुर्ग, विजय स्तम्भ, कीर्ति स्तम्भ, राणा कुम्भा का महल और पद्मिनी का महल प्रमुख हैं।
हाँ, चित्तौड़गढ़ दुर्ग यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल है।
शहर में बजट से लेकर लग्ज़री होटल्स उपलब्ध हैं। फतेह प्रकाश पैलेस एक हेरिटेज होटल है।
यह वीरता और बलिदान की भूमि है। मेवाड़ी लोक संगीत, घूमर नृत्य और गणगौर उत्सव यहाँ की संस्कृति का हिस्सा हैं।
इसे महाराणा कुम्भा ने 1448 ई. में विजय के प्रतीक के रूप में बनवाया था। यह 9 मंजिला और 122 फीट ऊँचा है।
हाँ, चित्तौड़गढ़ दुर्ग में शाम को हिंदी और अंग्रेजी में साउंड एंड लाइट शो होता है।
मीराबाई का मंदिर चित्तौड़गढ़ दुर्ग के अंदर राणा कुम्भा के महल परिसर में स्थित है।