बनारस में घूमने की जगह | Best Places To Visit in Banaras In Hindi
बनारस में घूमने की जगह, जिसे काशी या वाराणसी के नाम से भी जाना जाता है, यह दुनिया का सबसे पुराना शहर है, या यह बोले की दुनिया का पहला शहर और भारत की आध्यात्मिक राजधानी माना जाता है। पवित्र गंगा नदी के तट पर बसा यह शहर सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि एक अनुभव है जो आपको जीवन, मृत्यु और मोक्ष का दर्शन कराता है। यहां की संकरी गलियां, प्राचीन मंदिर, लगातार होने वाली आरतियां और बनारसी पान का स्वाद आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाता है। अगर आप इस पवित्र नगरी की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो सही जगह पर हैं। आज हम आपको बताएंगे बनारस में घूमने की जगह के बारे में, साथ ही यह भी बताएंगे कि आप वहां कब जाएं, क्या करें और क्या खाएं।
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Table of Contents
1. काशी विश्वनाथ मंदिर
- बनारस की यात्रा बिना बाबा विश्वनाथ के दर्शन के पूरी नहीं हो सकती। यह मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और हिंदुओं के लिए सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। यह प्रमुख बनारस में घूमने की जगह है, जहां दर्शन मात्र से ही मोक्ष की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।
- क्या खाएं: मंदिर परिसर के बाहर मिलने वाला मलाईयो और गर्मागर्म जलेबी जरूर ट्राई करें।
- कब जाएँ: सुबह जल्दी (4 बजे) की मंगला आरती के लिए जाएं, या रात में सोने से पहले शयन आरती का हिस्सा बनें।
- क्या करें: मंदिर के अंदर जाकर बाबा का आशीर्वाद लें और सोने से बने शिखर और मंदिर की भव्यता को देखें।
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2. अस्सी घाट
- यह घाट शहर का सबसे दक्षिणी प्रमुख घाट है और छात्रों एवं पर्यटकों के बीच सबसे लोकप्रिय है। यह एक जीवंत बनारस में घूमने की जगह है जो अपने कलात्मक माहौल के लिए जानी जाती है।
- कब जाएँ: सुबह सूर्योदय के समय यहां का नजारा देखते ही बनता है, जब लोग गंगा में स्नान करते हैं और योग करते हैं।
- क्या करें: सुबह की नाव की सवारी करें और गंगा में उगते सूरज को देखें।
- क्या खाएं: अस्सी घाट के पास भौकाल चाट का पालक चाट और आलू टिक्की बहुत मशहूर है।
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3. दशाश्वमेध घाट
- यह घाट गंगा नदी के सबसे प्रसिद्ध और जीवंत घाटों में से एक है। मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान ब्रह्मा ने दस अश्वमेध यज्ञ किए थे। शाम की आरती के लिए यह सबसे लोकप्रिय बनारस में घूमने की जगह मानी जाती है।
- कब जाएँ: शाम के समय, सूर्यास्त से ठीक पहले यहां पहुंच जाएं ताकि भव्य गंगा आरती में अच्छी जगह मिल सके।
- क्या करें: शाम की गंगा आरती देखना इस घाट का मुख्य आकर्षण है। मंत्रोच्चार के साथ की जाने वाली आरती अद्भुत होती है।
- क्या खाएं: घाट पर ही कई ठेले मिलेंगे जहाँ आप भेलपुरी, गर्म समोसे और चाय का लुत्फ उठा सकते हैं।
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4. सारनाथ
बनारस से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सारनाथ वह पवित्र स्थल है जहां भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था। यह बौद्ध धर्म के चार प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है और एक शांत बनारस में घूमने की जगह है।
- कब जाएँ: अक्टूबर से मार्च के बीच जब मौसम सुहावना हो। सुबह के समय यहां घूमना सबसे अच्छा रहता है।
- क्या करें: यहां विशाल धमेक स्तूप, प्राचीन मठों के खंडहर देखें और सारनाथ संग्रहालय में मौर्यकालीन कलाकृतियों को निहारें।
- क्या खाएं: सारनाथ में घूमने के बाद आप वहां के स्थानीय तिब्बती बाजार में मोमोज और थुपका का आनंद ले सकते हैं।
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5. मणिकर्णिका घाट
यह वाराणसी के सबसे पवित्र और प्राचीन घाटों में से एक है, जहां हिंदू अंतिम संस्कार की रस्में निभाई जाती हैं। इसे महाश्मशान भी कहा जाता है। यह एक अत्यंत संवेदनशील लेकिन महत्वपूर्ण बनारस में घूमने की जगह है।
- कब जाएँ: इसे देखने के लिए दिन का समय उपयुक्त है, रात में यह घाट विशाल दीयों की रोशनी से जगमगाता है।
- क्या करें: यहां जीवन और मृत्यु के सत्य को नजदीक से देखें। यहां तस्वीरें लेना वर्जित है, इसलिए कैमरे का इस्तेमाल न करें।
- क्या खाएं: इस घाट के पास कोई खाने की सलाह नहीं दी जाती, लेकिन पास की गलियों में मुंह मीठा करने के लिए राम बालू लड्डू मिलते हैं।
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6. संकट मोचन हनुमान मंदिर
भगवान हनुमान को समर्पित यह प्रसिद्ध मंदिर अस्सी नदी के किनारे स्थित है। इसे पंडित मदन मोहन मालवीय ने बनवाया था। आस्था के केंद्र के रूप में यह एक महत्वपूर्ण बनारस में घूमने की जगह है।
- क्या खाएं: इस मंदिर में चढ़ाए जाने वाले लड्डू बहुत प्रसिद्ध हैं।
- कब जाएँ: मंगलवार और शनिवार के दिन यहां विशेष भीड़ रहती है। सुबह या शाम की आरती में जाना सबसे अच्छा रहता है।
- क्या करें: हनुमान जी का आशीर्वाद लें और यहां की शांत आध्यात्मिक ऊर्जा को महसूस करें।
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7. तुलसी मानस मंदिर
यह आधुनिक और सुंदर मंदिर उस स्थान पर बनाया गया है जहां महाकवि तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना की थी। साहित्य और धर्म के संगम के लिए यह एक अनूठी बनारस में घूमने की जगह है।
- कब जाएँ: कभी भी, यह मंदिर सुबह से शाम तक खुला रहता है।
- क्या करें: मंदिर की दीवारों पर बने चित्रों और लेखों के माध्यम से रामायण की कहानी को पढ़ें और समझें।
- क्या खाएं: यहां से थोड़ी दूरी पर गोदौलिया चौक के पास दीना चाट भंडार की प्रसिद्ध पालक चाट खाएं।
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8. रामनगर का किला
गंगा नदी के पूर्वी तट पर स्थित यह ऐतिहासिक किला 1750 ईस्वी में बनारस के राजा बलवंत सिंह द्वारा बनवाया गया था। यह किला मुगल और हिंदू स्थापत्य कला का अनूठा मिश्रण है और एक शानदार ऐतिहासिक बनारस में घूमने की जगह है।
- क्या खाएं: रामनगर की गलियों में प्रसिद्ध बनारसी पान और लौंग लट्टा जरूर खाएं।
- कब जाएँ: सुबह 10 से शाम 5 बजे के बीच, सर्दियों के महीने यहां घूमने के लिए सबसे अच्छे हैं।
- क्या करें: किले के अंदर स्थित संग्रहालय देखें, जहां पुरानी पालकियां, हथियार और दुर्लभ पांडुलिपियां रखी हैं।
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9. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) और नया विश्वनाथ मंदिर
भारत के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक, BHU अपने विशाल परिसर और खूबसूरत इमारतों के लिए जाना जाता है। परिसर के अंदर स्थित नया विश्वनाथ मंदिर एक भव्य बनारस में घूमने की जगह है।
- कब जाएँ: सुबह या शाम के समय मंदिर के दर्शन के लिए जा सकते हैं। विश्वविद्यालय घूमने के लिए दिन का समय उपयुक्त है।
- क्या करें: विशाल परिसर में घूमें, नए विश्वनाथ मंदिर के दर्शन करें और भारत कला भवन संग्रहालय देखें।
- क्या खाएं: BHU के लंका गेट के पास श्री राम मिठाई और बीएचयू का चाट बहुत प्रसिद्ध है। खासकर यहां की स्पेशल चाट और दही भल्ले जरूर खाएं।
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10. भारत माता मंदिर
यह वाराणसी का एक अनोखा मंदिर है, जो किसी देवी-देवता को नहीं बल्कि भारत माता को समर्पित है। इसमें संगमरमर से बना भारत का एक विशाल और सटीक राहत नक्शा है। यह एक अद्वितीय और देशभक्ति से भरपूर बनारस में घूमने की जगह है।
- कब जाएँ: सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे के बीच।
- क्या करें: यहां लगे भारत के नक्शे को देखें, जो भौगोलिक और भूगर्भीय रूप से बेहद खूबसूरती से बनाया गया है।
- क्या खाएं: मंदिर के पास ही आपको प्रसिद्ध ग्रीन लस्सी शॉप मिल जाएगी, जहां की भांग की ठंडाई और लस्सी बहुत प्रसिद्ध है।
जाने का सही समय:
- बनारस घूमने का सबसे अच्छा समय सर्दियों के महीने यानी अक्टूबर से मार्च के बीच होता है।
- जब मौसम सुहावना होता है और घूमने के लिए एकदम सही रहता है।
- इस दौरान आप यहां के घाटों, मंदिरों और गलियों का भरपूर आनंद ले सकते हैं।
बनारस कैसे जाएँ
बनारस (वाराणसी) भारत के प्रमुख शहरों से सड़क, रेल और हवाई मार्ग द्वारा बहुत अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
हवाई मार्ग (By Air):
- शहर से लगभग 22-26 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में बाबतपुर स्थित
- लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (IATA कोड: VNS) यहाँ का निकटतम एयरपोर्ट है।
- यह हवाई अड्डा घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों तरह की उड़ानों के लिए सुविधाजनक है।
रेल मार्ग (By Train):
- वाराणसी एक प्रमुख रेल जंक्शन है और देश के सभी महानगरों एवं प्रमुख शहरों से रेल सेवा से जुड़ा हुआ है।
- दिल्ली से बनारस आने के लिए सद्भावना एक्सप्रेस, शिव गंगा एक्सप्रेस, महामना एक्सप्रेस जैसी कई ट्रेनें उपलब्ध हैं।
- इसके अलावा, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, लखनऊ, प्रयागराज, पटना आदि से भी सीधी ट्रेनें हैं।
सड़क मार्ग (By Road):
- वाराणसी सड़क मार्ग से भी कई प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच 2 (दिल्ली-कोलकाता), एनएच 7 और एनएच 19 से जुड़ा है।
- प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग की दूरी: प्रयागराज (128 किमी), लखनऊ (286 किमी), पटना (246 किमी), आगरा (565 किमी)।
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निष्कर्ष:
- बनारस घूमने की जगह के इस सफर में ये 10 स्थान आपको शहर की आत्मा से रूबरू कराएंगे। हर घाट की अपनी एक कहानी है, हर मंदिर में एक अलग ही शांति है और हर गली में एक अनोखा स्वाद छिपा है। यह सूची आपको यह तय करने में मदद करेगी कि आपकी अगली बनारस घूमने की जगह कौन सी होनी चाहिए। बनारस आपको बार-बार अपने पास बुलाता है, इसलिए जी भर कर इस शहर के रंग में रंगिए और इसके हर पल को संजोइए। याद रखिए, बनारस की यात्रा तभी पूरी होती है जब आप यहां की संस्कृति, आध्यात्म और स्वाद के हर रंग को अपने भीतर उतार लेते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
उत्तर: अक्टूबर से मार्च के बीच का सर्दियों का मौसम।
उत्तर: 2 से 3 दिन पर्याप्त हैं।
उत्तर: चाट, मलाईयो, कचोरी और बनारसी पान।
उत्तर: हवाई अड्डा, रेलवे स्टेशन और सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है।
उत्तर: 50 से 100 रुपये प्रति व्यक्ति (मोलभाव करें)।
उत्तर: हाँ, बहुत आसानी से और प्रचुर मात्रा में।
उत्तर: काशी विश्वनाथ, संकट मोचन, तुलसी मानस मंदिर।
उत्तर: काशी विश्वनाथ में नहीं, BHU वाले मंदिर में हाँ।
उत्तर: दशाश्वमेध घाट पर प्रतिदिन सूर्यास्त के बाद।
उत्तर: हाँ, 3-4 घंटे की दूरी है, एक दिन की ट्रिप संभव है।