करणी माता मंदिर बीकानेर | Karni Mata Temple Rajasthan
करणी माता मंदिर राजस्थान के बीकानेर जिले के देशनोक नामक छोटे से कस्बे में स्थित यह मंदिर आस्था, भक्ति और प्रकृति के अद्भुत सामंजस्य का प्रतीक है। यहाँ की आस्था और लोक मान्यताएँ भी उतनी ही अनूठी हैं। ऐसा ही एक चमत्कारिक और रहस्यमयी स्थान है करणी माता मंदिर, जिसे दुनिया भर में चूहों के मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहाँ चूहों को पवित्र माना जाता है और उनकी पूजा होती है, जो दुनिया भर के पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए कौतूहल का विषय है। यदि आप भारत के सबसे अजीबोगरीब और आध्यात्मिक स्थलों की यात्रा करना चाहते हैं, तो करणी माता मंदिर आपकी सूची में सबसे ऊपर होना चाहिए।
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इतिहास और पौराणिक कथा
करणी माता मंदिर का इतिहास 15वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है। यह मंदिर माँ दुर्गा की अवतार मानी जाने वाली करणी माता को समर्पित है। करणी माता का जन्म 1387 में हुआ था और वे अपनी अलौकिक शक्तियों और करुणा के लिए जानी जाती थीं। वे बीकानेर और जोधपुर के शाही परिवारों की आराध्य देवी थीं। इस मंदिर को वर्तमान स्वरूप बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह ने राजपूत शैली में बनवाया था।
करणी माता मंदिर से जुड़ी सबसे प्रचलित कथा के अनुसार, एक बार करणी माता के सौतेले पुत्र लक्ष्मण की कोलायत में एक तालाब में डूबने से मृत्यु हो गई। माँ करणी ने उसे जीवित करने के लिए यमराज से प्रार्थना की, लेकिन यमराज ने इनकार कर दिया। तब माँ करणी ने क्रोधित होकर यह प्रतिज्ञा ली कि अब उनके कुल के लोगों की मृत्यु के बाद आत्मा यमलोक नहीं जाएगी, बल्कि वे चूहों के शरीर में धारण करेंगे और उनके इसी मंदिर में निवास करेंगे। जब ये चूहे मरेंगे, तो वे पुनः मानव रूप में उनके कुल में जन्म लेंगे। तभी से करणी माता मंदिर में हजारों की संख्या में चूहे रहते हैं, जिन्हें काबा (संतान) कहा जाता है। भक्तों का मानना है कि ये चूहे करणी माता के वंशज और भक्त हैं, जो यहीं सुरक्षित रहते हैं।
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चूहे क्यों हैं पवित्र?
- करणी माता मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ रहने वाले लगभग 20,000 से 25,000 चूहे हैं।
- ये चूहे बिना किसी भय के मंदिर परिसर में स्वतंत्र रूप से विचरण करते हैं।
- श्रद्धालु इन्हें पवित्र मानते हैं और बड़ी श्रद्धा से इनकी सेवा करते हैं।
- ऐसा विश्वास है कि यदि कोई भक्त चूहे के मरणापर्यन्त उसकी सेवा करता है, तो उसे अगले जन्म में मानव योनि प्राप्त होगी।
- करणी माता मंदिर के चूहों को दूध, मिठाई और नारियल आदि खिलाया जाता है।
- विशेष बात यह है कि यहाँ कुछ सफेद चूहे भी हैं, जिन्हें अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है।
- भक्तों का विश्वास है कि ये सफेद चूहे स्वयं करणी माता और उनके चार पुत्रों का अवतार हैं।
- करणी माता मंदिर में यदि कोई सफेद चूहा दिखाई दे जाए तो उसे बहुत बड़ा सौभाग्य माना जाता है।
- कहा जाता है कि सफेद चूहे का दर्शन मात्र ही मनोकामना पूर्ण कर देता है।
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वास्तुकला और स्वरूप
- करणी माता मंदिर अपनी भव्य वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध है।
- मंदिर का मुख्य द्वार चांदी से निर्मित है, जिस पर देवी करणी माता के जीवन से जुड़े दृश्यों की अद्भुत नक्काशी की गई है।
- मंदिर का अग्रभाग सफेद संगमरमर से बना है, जबकि अन्य भाग लाल बलुआ पत्थर से निर्मित है।
- मंदिर के अंदर संगमरमर के फर्श और नक्काशीदार स्तंभ इसकी सुंदरता को और बढ़ाते हैं।
- मुख्य गर्भगृह में माता करणी की प्रतिमा विराजमान है। गर्भगृह के चारों ओर चूहे स्वच्छंद रूप से घूमते रहते हैं।
- मंदिर के ऊपर जालीदार पर्दे और जालियाँ लगाई गई हैं ताकि बाहर से शिकारी पक्षी अंदर न आ सकें और चूहे सुरक्षित रहें।
- करणी माता मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहाँ पूर्ण स्वच्छता रहती है।
- चूहों के कारण कोई दुर्गंध या गंदगी नहीं होती। यह अपने आप में एक चमत्कार से कम नहीं है।
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दर्शन और विश्वास
- करणी माता मंदिर में प्रवेश करते ही आप भक्ति और आस्था के अनूठे वातावरण का अनुभव करेंगे।
- यहाँ भक्त चूहों को भोग लगाते हैं और उनके बीच बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं।
- ऐसी मान्यता है कि इन चूहों द्वारा कुतरा हुआ प्रसाद खाना बहुत शुभ होता है।
- यदि कोई चूहा आपके पैरों पर चढ़ जाए या आपके ऊपर से गुजर जाए, तो यह बहुत शुभ संकेत माना जाता है।
- मंदिर में एक पवित्र जल का कुंड भी है, जहाँ से भक्त जल ग्रहण करते हैं।
- करणी माता मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम आरती होती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
- मंदिर प्रशासन द्वारा चूहों के लिए नियमित रूप से दूध, मिठाई और दाने की व्यवस्था की जाती है।
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कब जाएँ (Best Time to Visit)
- यदि आप करणी माता मंदिर की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो सबसे उपयुक्त समय अक्टूबर से मार्च के बीच का है।
- इस दौरान राजस्थान का मौसम सुहावना और ठंडा रहता है, जिससे यात्रा सुखद हो जाती है।
- गर्मियों के मौसम (अप्रैल से जून) में यहाँ अत्यधिक गर्मी होती है, जिससे यात्रा करना कठिन हो सकता है।
- हालाँकि, मंदिर के कपाट साल के हर दिन सुबह 4:00 बजे से रात 10:00 बजे तक खुले रहते हैं।
- आप किसी भी समय दर्शन के लिए जा सकते हैं।
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त्यौहार और मेले
- करणी माता मंदिर में साल में दो बार विशाल मेले का आयोजन होता है, जो नवरात्रि के अवसर पर होता है।
- पहला मेला चैत्र नवरात्रि (मार्च-अप्रैल) में और दूसरा, जो अधिक बड़ा होता है, शारदीय नवरात्रि (सितंबर-अक्टूबर) में लगता है।
- इन दिनों में श्रद्धालुओं से खचाखच भर जाता है और यहाँ भव्य आयोजन होते हैं।
- दूर-दूर से श्रद्धालु पैदल यात्रा करके यहाँ माता का आशीर्वाद लेने आते हैं।
- इस समय मंदिर का नजारा देखते ही बनता है।
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कैसे जाएँ (How to Reach)
करणी माता मंदिर राजस्थान के बीकानेर जिले के देशनोक कस्बे में स्थित है। यहाँ पहुँचने के लिए आप किसी भी परिवहन साधन का उपयोग कर सकते हैं। यहाँ से जयपुर की दूरी लगभग 320 किलोमीटर है।
हवाई मार्ग (By Air):
- सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा बीकानेर का नाल एयरपोर्ट है, जो करणी माता मंदिर से लगभग 31-45 किलोमीटर दूर है।
- हालाँकि, यहाँ सीमित उड़ानें हैं। बेहतर विकल्प जयपुर का अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है।
- जहाँ से आप टैक्सी या बस द्वारा आसानी से पहुँच सकते हैं।
रेल मार्ग (By Train):
- देशनोक रेलवे स्टेशन करणी माता मंदिर से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर है।
- यहाँ ट्रेनें रुकती हैं, जो इसे आसानी से पहुँचने योग्य बनाती हैं।
- वैकल्पिक रूप से, बीकानेर जंक्शन एक प्रमुख रेलवे स्टेशन है, जो यहाँ से लगभग 30-35 किलोमीटर दूर है।
- बीकानेर पहुँचकर आप टैक्सी या बस से रवाना हो सकते हैं।
- जयपुर से सीधी ट्रेन देशनोक के लिए उपलब्ध है, जिसमें लगभग 5 से 6 घंटे लगते हैं।
सड़क मार्ग (By Road):
- सड़क मार्ग से पहुँचना सबसे सुविधाजनक तरीका है।
- यह राष्ट्रीय राजमार्ग 62 पर स्थित है, जो इसे कई शहरों से जोड़ता है।
- जयपुर से बीकानेर के लिए नियमित राजस्थान परिवहन बसें मिल जाती हैं।
- जहाँ से आप आगे के लिए स्थानीय बस या टैक्सी ले सकते हैं।
- सबसे आरामदायक विकल्प जयपुर या बीकानेर से सीधे टैक्सी किराए पर लेना है।
- जयपुर से सड़क यात्रा में लगभग 4 से 5 घंटे लगते हैं।
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निष्कर्ष:
यह न केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह मानव और प्रकृति के बीच अटूट विश्वास और सह-अस्तित्व का प्रतीक है। यहाँ की कथा, इतिहास और अद्भुत परंपरा हर आगंतुक को आश्चर्यचकित कर देती है। यदि आप राजस्थान की यात्रा पर हैं, तो इस अनूठे और अविस्मरणीय मंदिर के दर्शन अवश्य करें। यहाँ की ऊर्जा और आस्था का अनुभव आपको एक नई दृष्टि प्रदान करेगा। चाहे आप कितने ही संशयवादी क्यों न हों, करणी माता की यात्रा आपको विश्वास और चमत्कारों की उस दुनिया में ले जाएगी, जहाँ इंसान और चूहे एक ही परिवार के सदस्य की तरह रहते हैं और माँ करणी का आशीर्वाद सब पर बरसता है। यह अनोखी परंपरा सदियों से चली आ रही है और आने वाली सदियों तक यह मानव आस्था का अद्भुत केंद्र बना रहेगा।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
उत्तर: राजस्थान के बीकानेर जिले के देशनोक कस्बे में।
उत्तर: यहाँ हजारों चूहे रहते हैं, जिन्हें पवित्र मानकर पूजा जाता है। इसे ‘चूहों का मंदिर’ कहा जाता है।
उत्तर: मान्यता है कि ये करणी माता के वंशज हैं, जो मरने के बाद यहाँ चूहे बनकर जन्म लेते हैं।
उत्तर: यह अत्यंत दुर्लभ है। इसे स्वयं करणी माता का रूप माना जाता है और इसके दर्शन को सौभाग्यशाली माना जाता है।
उत्तर: सुबह 4:00 बजे से रात 10:00 बजे तक (सप्ताह के सभी दिन)।
उत्तर: अक्टूबर से मार्च के बीच (ठंड का मौसम)।
उत्तर: परंपरा के अनुसार, सोने या चाँदी का चूहा चढ़ाना होता है।
उत्तर: मंदिर के अंदर फोटोग्राफी वर्जित है। बाहर ले सकते हैं।
उत्तर: नहीं, बिल्कुल सुरक्षित हैं। मंदिर बहुत साफ रहता है।
उत्तर: यह बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि मनोकामना पूरी होती है।