उज्जैन के प्रमुख मंदिर | Famous Temples to Visit in Ujjain
उज्जैन, जिसे महाकाल की नगरी के नाम से भी जाना जाता है, भारत के सबसे प्राचीन और पवित्र शहरों में से एक है। पवित्र क्षिप्रा नदी के तट पर बसा यह शहर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि अपने समृद्ध इतिहास, संस्कृति और वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां हर गली में एक मंदिर है और हर पत्थर के पीछे एक कहानी है। अगर आप इस दिव्य शहर की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए एक संपूर्ण मार्गदर्शक है। इसमें हम आपको उज्जैन के दर्शनीय स्थल से रूबरू कराएंगे, जहां की यात्रा आपके मन, मस्तिष्क और आत्मा को एक अलग ही शांति का अनुभव कराएगी। आइए, इस लेख के माध्यम से जानते हैं उज्जैन के दर्शनीय स्थल के बारे में विस्तार से, जहां का हर कोना भक्ति और ऐतिहासिकता की गाथा कहता है।
Table of Contents
1. महाकालेश्वर मंदिर (Mahakaleshwar Temple)
उज्जैन के दर्शनीय स्थल की बात जब भी होती है, तो सबसे पहला नाम महाकालेश्वर मंदिर का आता है। यह मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और विशेष रूप से इसकी दक्षिणमुखी प्रतिमा के लिए जाना जाता है । यहां प्रतिदिन सुबह होने वाली भस्म आरती का अपना ही अलग महत्व है, जिसमें भगवान को चिता की राख से स्नान कराया जाता है, जो जीवन की नश्वरता का प्रतीक है।
- स्थान और खुलने का समय: सुबह 3:00 बजे से रात 11:00 बजे तक। भस्म आरती सुबह 4:00 बजे होती है।
- कब जाएँ: अक्टूबर से मार्च का महीना सबसे उपयुक्त रहता है।
- शहर से दूरी: उज्जैन रेलवे स्टेशन से लगभग 1.5 से 2 किमी।
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2. काल भैरव मंदिर (Kal Bhairav Temple)
यह मंदिर उज्जैन के दर्शनीय स्थलों में सबसे अनोखा है। यह भगवान भैरव (शिव के उग्र रूप) को समर्पित है, जहां भक्तों द्वारा प्रसाद के रूप में शराब चढ़ाने की परंपरा है। ऐसी मान्यता है कि चढ़ाई गई शराब स्वयं भगवान ग्रहण करते हैं ।
- स्थान और खुलने का समय: सुबह 5:00 बजे से रात 9:00 बजे तक।
- कब जाएँ: पूरे वर्ष जा सकते हैं।
- शहर से दूरी: रेलवे स्टेशन से लगभग 5-6 किमी।
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3. हरसिद्धि माता मंदिर (Harsiddhi Mata Temple)
यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहां माता सती की कोहनी गिरी थी । यहां के दो विशाल दीप स्तंभ (दीप स्तम्भ) अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध हैं। नवरात्रि के अवसर पर यहां हजारों दीयों से इन स्तंभों को जलाया जाता है, जिसका दृश्य अद्भुत होता है।
- स्थान और खुलने का समय: सुबह 5:00 बजे से रात 10:00 बजे तक।
- कब जाएँ: अक्टूबर से मार्च।
- शहर से दूरी: महाकालेश्वर मंदिर से लगभग 1 किमी।
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4. राम घाट (Ram Ghat)
क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित राम घाट उज्जैन के दर्शनीय स्थल में एक प्रमुख आध्यात्मिक स्थल है। यह कुंभ मेले का मुख्य केंद्र भी है। यहां प्रतिदिन शाम को होने वाली भव्य आरती का दृश्य अत्यंत मनमोहक होता है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित होते हैं ।
- कब जाएँ: शाम की आरती के समय (सूर्यास्त के बाद)।
- शहर से दूरी: रेलवे स्टेशन से लगभग 2 किमी ।
- स्थान और खुलने का समय: हमेशा खुला रहता है।
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5. चिंतामन गणेश मंदिर (Chintaman Ganesh Temple)
यह मंदिर उज्जैन के सबसे पुराने और प्रसिद्ध गणेश मंदिरों में से एक है। माना जाता है कि यहां की गणेश प्रतिमा स्वयंभू है और इसकी पूजा करने से सभी चिंताएं दूर होती हैं ।
- स्थान और खुलने का समय: सुबह 5:00 बजे से रात 10:00 बजे तक
- कब जाएँ: बुधवार का दिन विशेष शुभ माना जाता है।
- शहर से दूरी: रेलवे स्टेशन से लगभग 7 किमी।
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6. मंगलनाथ मंदिर (Mangalnath Temple)
यह मंदिर ग्रहों के राजा मंगल (मंगल ग्रह) को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि यहीं पर मंगल का जन्म हुआ था, जिस कारण इस स्थान का विशेष ज्योतिषीय महत्व है । यहां से क्षिप्रा नदी का सुंदर दृश्य दिखाई देता है।
- स्थान और खुलने का समय: सुबह 4:00 बजे से रात 8:00 बजे तक ।
- कब जाएँ: सूर्योदय के समय या मंगलवार के दिन।
- शहर से दूरी: रेलवे स्टेशन से लगभग 6 किमी।
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7. सांदीपनि आश्रम (Sandipani Ashram)
पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह वह पवित्र स्थान है जहां भगवान कृष्ण, बलराम और सुदामा ने गुरु सांदीपनि के आश्रम में शिक्षा प्राप्त की थी । यहां गोमती कुंड भी स्थित है, जिसका पानी सभी पवित्र नदियों के समान माना जाता है ।
- स्थान और खुलने का समय: सुबह 7:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक ।
- कब जाएँ: पूरे वर्ष।
- शहर से दूरी: रेलवे स्टेशन से लगभग 5 किमी ।
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8. वेध शाला (जंतर मंतर) – (Vedh Shala / Jantar Mantar)
महाराजा जयसिंह द्वितीय द्वारा निर्मित यह वेधशाला प्राचीन भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों का प्रमाण है। यहां सूर्य, चंद्र और ग्रहों की गति का अध्ययन करने के लिए विभिन्न प्रकार के अद्भुत खगोलीय उपकरण मौजूद हैं । यह स्थान उज्जैन के दर्शनीय स्थल में एक अलग ही पहचान रखता है।
- स्थान और खुलने का समय: सुबह से शाम तक।
- कब जाएँ: अक्टूबर से मार्च।
- शहर से दूरी: रेलवे स्टेशन से लगभग 3 किमी ।
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9. गोपाल मंदिर (Gopal Mandir)
शिंदे राजवंश द्वारा 19वीं शताब्दी में निर्मित यह भव्य मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है। इसकी संगमरमर की बनावट और गर्भगृह के चांदी के दरवाजे, जो कभी सोमनाथ मंदिर का हिस्सा थे, इसे विशेष बनाते हैं ।
- स्थान और खुलने का समय: सुबह 5:00 बजे से 12:00 बजे तक और दोपहर 2:00 बजे से रात 10:00 बजे तक ।
- कब जाएँ: सुबह या शाम के समय।
- शहर से दूरी: शहर के बाजार के अंदर, रेलवे स्टेशन से करीब 2 किमी।
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10. गढ़कालिका मंदिर (Gadkalika Temple)
यह मंदिर देवी कालिका को समर्पित है और इसका संबंध महान संस्कृत कवि कालिदास से है। ऐसी मान्यता है कि कालिदास ने इसी मंदिर के आशीर्वाद से ज्ञान प्राप्त किया था ।
- स्थान और खुलने का समय: सुबह 6:00 बजे से रात 9:00 बजे तक ।
- कब जाएँ: नवरात्रि के दिनों में विशेष छटा देखने को मिलती है।
- शहर से दूरी: शहर से लगभग 5 किमी दूर।
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11. इस्कॉन मंदिर (ISKCON Temple)
आधुनिक वास्तुकला का बेहतरीन नमूना, यह मंदिर भगवान कृष्ण और राधा को समर्पित है। सफेद संगमरमर से बना यह मंदिर अपनी सुंदरता, शांत वातावरण और भजन-कीर्तन के लिए जाना जाता है । यह उज्जैन के दर्शनीय स्थल में एक शांतिपूर्ण स्थान है।
- कब जाएँ: जन्माष्टमी के आसपास।
- शहर से दूरी: शहर से लगभग 4-5 किमी।
- स्थान और खुलने का समय: सुबह 4:30 बजे से रात 8:30 बजे तक ।
12. कालियादेह महल (Kaliadeh Palace)
क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित यह सुंदर महल एक ऐतिहासिक स्थल है। यह अपनी वास्तुकला और सूर्य की किरणों के अध्ययन के लिए बनाए गए यंत्रों के लिए जाना जाता था। दुर्भाग्यवश, यह अब खंडहर अवस्था में है, फिर भी यह घूमने लायक स्थान है।
- कब जाएँ: सर्दियों के मौसम में।
- शहर से दूरी: शहर से लगभग 8 किमी।
- स्थान और खुलने का समय: सूर्योदय से सूर्यास्त तक।
13. भर्तृहरि गुफाएं (Bhartrihari Caves)
सांदीपनि आश्रम के पास स्थित ये गुफाएं राजा भर्तृहरि से जुड़ी हुई हैं, जिन्होंने राज-पाठ त्यागकर यहां तपस्या की थी। यह स्थान ध्यान और योग के लिए बहुत शांत और उपयुक्त है।
- कब जाएँ: पूरे वर्ष।
- शहर से दूरी: सांदीपनि आश्रम के नजदीक, शहर से लगभग 5 किमी।
- स्थान और खुलने का समय: सुबह से शाम तक।
14. विष्णु सागर तालाब (Vishnu Sagar Taalab)
यह एक ऐतिहासिक और शांत जलाशय है, जो महाकालेश्वर मंदिर के करीब स्थित है। 11वीं शताब्दी में निर्मित यह तालाब धार्मिक और मनोरंजक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां सुबह-शाम टहलना और पक्षियों का कलरव मन को सुकून देता है ।
- कब जाएँ: सुबह 6:00 से 8:00 बजे के बीच।
- शहर से दूरी: शहर के केंद्र से लगभग 4 किमी ।
- स्थान और खुलने का समय: सुबह 5:00 बजे से शाम 8:00 बजे तक
15. द्वारकाधीश मंदिर (Dwarkadhish Temple)
शहर के बीचों-बीच स्थित यह मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है और अपनी भव्य मूर्तियों और बेहतरीन नक्काशी के लिए जाना जाता है। यहां का वातावरण हमेशा भक्ति और उल्लास से भरा रहता है।
- कब जाएँ: जन्माष्टमी पर विशेष झांकी देखने लायक होती है।
- शहर से दूरी: रेलवे स्टेशन से लगभग 1.5 किमी।
- स्थान और खुलने का समय: सुबह और शाम।
निष्कर्ष:
उज्जैन सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभूति है। यहां का हर मंदिर, हर घाट और हर गली भक्ति और इतिहास से सराबोर है। उज्जैन के दर्शनीय स्थल आपको न केवल एक अलग दुनिया का अहसास कराते हैं, बल्कि आपके मन को शांति और आत्मा को संतुष्टि प्रदान करते हैं। चाहे आप भक्त हों या इतिहास प्रेमी, उज्जैन की यात्रा आपके जीवन के सबसे यादगार अनुभवों में से एक होगी। तो अगली बार जब भी आप कोई आध्यात्मिक यात्रा प्लान करें, तो उज्जैन को अपनी सूची में ज़रूर शामिल करें और उज्जैन के दर्शनीय स्थलों की इस अद्भुत यात्रा का आनंद लें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
उत्तर: उज्जैन मुख्य रूप से भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर मंदिर के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर: उज्जैन घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच है। इस समय मौसम सुहावना रहता है और गर्मी से राहत मिलती है।
उत्तर: महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती के लिए ऑनलाइन बुकिंग की व्यवस्था है।
उत्तर: उज्जैन के प्रमुख दर्शनीय स्थलों को देखने और आध्यात्मिक अनुभव लेने के लिए 2 से 3 दिन का समय पर्याप्त रहता है।
उत्तर: नहीं, एक दिन में उज्जैन के दर्शनीय स्थलों के सभी प्रमुख मंदिरों को देखना मुश्किल है। कम से कम 2 दिन का समय जरूरी है।
उत्तर: काल भैरव मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ का प्रसाद है। यहाँ भगवान को शराब (लिकर) चढ़ाई जाती है।
उत्तर: राम घाट पर शाम की भव्य आरती सूर्यास्त के बाद (लगभग शाम 6:00 से 7:00 बजे के आसपास) होती है।
उत्तर: ज़्यादातर मंदिर रात 8-9 बजे तक बंद हो जाते हैं, लेकिन महाकालेश्वर मंदिर देर रात 11:00 बजे तक खुला रहता है।
उत्तर: उज्जैन का प्राचीन नाम “अवंतिका” (Avantika) और “उज्जयिनी” (Ujjayini) था।
उत्तर: काल भैरव मंदिर में भगवान के सामने उनके वाहन कुत्ते (Dog) की मूर्ति स्थापित है। यह मंदिर की एक खास पहचान है।