अजमेर में घूमने की जगह | Best Places To Visit In Ajmer
अजमेर, राजस्थान का एक आध्यात्मिक, समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत महत्व के शहरों में अजमेर एक अद्वितीय स्थान रखता है। अरावली पहाड़ियों की गोद में बसा एक अनमोल रत्न है। यह शहर सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है, लेकिन इसकी गोद में और भी कई ऐसे अजमेर के दर्शनीय स्थल छुपे हैं जो इतिहास, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हैं। चाहे आप एक धार्मिक यात्री हों, इतिहास के प्रेमी हों या प्रकृति की गोद में समय बिताना चाहते हों, अजमेर आपको हर रंग में रंगने की क्षमता रखता है। आइए जानते हैं इस शहर के टॉप 10 ऐसे अजमेर के दर्शनीय स्थल जो आपकी यात्रा को अविस्मरणीय बना देंगे।
Table of Contents
1. ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह – आस्था का केंद्र
अजमेर का सबसे प्रसिद्ध और पवित्र स्थल, ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह, दुनिया भर से लाखों तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को आकर्षित करता है। यह जगह अजमेर के दर्शनीय स्थल प्रथम स्थान आता है। 13वीं शताब्दी में स्थापित, यह दरगाह सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की याद में बनाई गई है, जिन्होंने अपना जीवन गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा में समर्पित कर दिया।
- कब जाएँ: साल भर, लेकिन विशेष रूप से उर्स के समय (इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार)
- जब यहाँ अद्भुत रौनक देखने को मिलती है।
- क्या करें: दरगाह पर चादर चढ़ाएँ, प्रार्थना करें, और यहाँ की शांत और आध्यात्मिक वातावरण का आनंद लें।
- रात की क़व्वाली जरूर सुनें।
- जाने का सही समय: सुबह जल्दी या देर शाम का समय भीड़ से बचने और गहन अनुभव के लिए अच्छा रहता है।
- गर्मियों में दिन के समय भीषण गर्मी से बचें।
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2. अना सागर झील – शहर का हृदयस्थल
अना सागर झील अजमेर के प्राकृतिक सौंदर्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इस झील का निर्माण 12वीं शताब्दी में राजा अर्णोराज (अन्नाजी) ने करवाया था। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहाँ का नज़ारा अतुलनीय होता है। प्रकृति प्रेमियों के लिए, यह झील अजमेर के दर्शनीय स्थल में एक अवश्य देखने लायक जगह है जो शहर की हलचल से दूर शांति प्रदान करती है।
- कब जाएँ: वर्ष के किसी भी समय, विशेषकर सुबह या शाम को जब मौसम सुहावना हो।
- क्या करें: झील के किनारे टहलने का आनंद लें, नाव की सवारी करें,
- और बारादरी (मंडप) में बैठकर शांतिपूर्ण वातावरण का अनुभव करें। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह एक आदर्श स्थल है।
- जाने का सही समय: अक्टूबर से मार्च का समय सबसे अच्छा रहता है,
- क्योंकि गर्मियों में दोपहर का तापमान बहुत अधिक हो सकता है।
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3. अकबर का किला / अजमेर संग्रहालय – इतिहास का भंडार
अरावली पहाड़ियों पर स्थित यह भव्य किला सम्राट अकबर ने 1570 ईस्वी में बनवाया था। बाद में इसे ब्रिटिश शासन के दौरान एक संग्रहालय में तब्दील कर दिया गया, जिसे अजमेर संग्रहालय के नाम से जाना जाता है। यह संग्रहालय अजमेर और आसपास के क्षेत्र के समृद्ध इतिहास को समेटे हुए है और निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण अजमेर के दर्शनीय स्थल है।
- कब जाएँ: अक्टूबर से मार्च तक का समय यहाँ घूमने के लिए आदर्श है।
- क्या करें: किले की वास्तुकला को देखें, संग्रहालय में प्राचीन मूर्तियों, शस्त्रों,
- और राजपूत और मुगल काल की कलाकृतियों का अवलोकन करें।
- जाने का सही समय: सुबह का समय, जब संग्रहालय खुलता है (सामान्यतः 10 बजे)।
- इस समय भीड़ कम होती है और आप आराम से घूम सकते हैं।
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4. नारेली जैन मंदिर – पहाड़ी की चोटी पर विराजमान
अजमेर से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित नारेली जैन मंदिर एक और खूबसूरत जैन तीर्थ स्थल है। यह मंदिर एक पहाड़ी की चोटी पर बना हुआ है और इसकी वास्तुकला अत्यंत आकर्षक और आधुनिक है। यह मंदिर अपनी सफेद संगमरमर की सुंदर संरचना और प्राकृतिक परिवेश के लिए जाना जाता है। यह शांति और आध्यात्मिकता की तलाश करने वालों के लिए एक उत्तम अजमेर के दर्शनीय स्थल है।
- कब जाएँ: किसी भी मौसम में, लेकिन सर्दियों में यहाँ का मौसम घूमने के लिए बिल्कुल सही रहता है।
- क्या करें: पहाड़ी पर स्थित मुख्य मंदिर तक पहुँचें, शहर के सुंदर दृश्य का आनंद लें,
- और मंदिर परिसर की शांति का अनुभव करें।
- जाने का सही समय: सुबह या शाम का समय, क्योंकि दिन में धूप तेज हो सकती है।
- मंदिर तक पहुँचने के लिए सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं।
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5. सोनी जी की नसियां – जैन धर्म की भव्यता
सोनी जी की नसियाँ अजमेर का एक प्रमुख जैन मंदिर परिसर है जिसे 19वीं शताब्दी के अंत में बनाया गया था। यह मंदिर अपनी आकर्षक वास्तुकला और सोने की पन्नी से सजी मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर जैन समुदाय की आस्था और कला का बेहतरीन उदाहरण है और अजमेर के दर्शनीय स्थल में गिना जाने वाला एक अत्यंत सुंदर और शांतिपूर्ण स्थान है। मंदिर के अंदर की नक्काशीदार दीवारें और स्तंभ आगंतुकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।
- कब जाएँ: वैसे तो साल भर, लेकिन जैन धर्म के विशेष पर्वों पर यहाँ विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है।
- क्या करें: मुख्य मंदिर की भव्य स्थापत्य कला देखें, आध्यात्मिक शांति का अनुभव करें, और जैन धर्म के सिद्धांतों के बारे में जानें।
- जाने का सही समय: सुबह का समय जब मंदिर में आरती होती है और वातावरण पवित्र और शांत होता है।
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6. फॉयसागर झील – प्राकृतिक सुंदरता का खजाना
आनासागर झील के बाद अजमेर की दूसरी प्रमुख झील है फॉयसागर। यह झील मूल रूप से शहर के लिए पानी की आपूर्ति के लिए बनाई गई थी, लेकिन अब यह एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन गई है। फॉयसागर झील शहर के शोर-शराबे से दूर एक शांत जगह है और यह अजमेर के दर्शनीय स्थल में प्रकृति प्रेमियों के लिए एक आदर्श स्थान है। यहाँ का शांत वातावरण मन को सुकून देता है।
- कब जाएँ: बारिश के बाद यह झील पूरी तरह भर जाती है और इसकी सुंदरता देखते ही बनती है।
- क्या करें: झील के किनारे शाम की सैर का आनंद लें, पक्षियों को देखें (माइग्रेटरी सीजन में), और फॉयसागर बांध के पास फोटोग्राफी करें।
- जाने का सही समय: सूर्यास्त का समय, जब आसमान में रंग बिखरने के साथ झील का नज़ारा बेहद रमणीय लगता है।
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7. तारागढ़ किला – अजमेर का प्रहरी
तारागढ़ किला, जिसे ‘स्टार किले’ के नाम से भी जाना जाता है, अरावली पहाड़ियों पर स्थित एक विशाल और ऐतिहासिक किला है। इसे 14वीं शताब्दी में अजय पाल चौहान ने बनवाया था। यह किला अपने गौरवशाली अतीत और वीरता की कहानियों के लिए जाना जाता है। यह किला न केवल एक ऐतिहासिक धरोहर है बल्कि एक ट्रेकिंग स्पॉट भी है और इसे अजमेर के दर्शनीय स्थल में सबसे रोमांचक जगहों में से एक माना जा सकता है। यहाँ की ऊँचाई से पूरे शहर का नज़ारा अविस्मरणीय होता है।
- जाने का सही समय: देर दोपहर, ताकि आप वहाँ सूर्यास्त का मनोरम दृश्य देख सकें।
- कब जाएँ: सर्दियों का मौसम (नवंबर से फरवरी) यहाँ की चढ़ाई और घूमने के लिए सबसे उपयुक्त है।
- क्या करें: किले तक की ट्रेकिंग का आनंद लें, यहाँ से अजमेर शहर का शानदार पैनोरमिक दृश्य देखें, और ऐतिहासिक
- संरचनाओं जैसे मीरान साहब की दरगाह और बड़ी बुरज को देखें।
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8. मैग्जीन संग्रहालय – राजस्थानी शिल्प का संग्रह
राजकीय मैग्जीन संग्रहालय, जिसे अजमेर गवर्नमेंट म्यूजियम के नाम से भी जाना जाता है, शहर के बीचों-बीच स्थित है। यह संग्रहालय राजस्थान की समृद्ध कला और शिल्प परंपरा को प्रदर्शित करता है। यह संग्रहालय कला और संस्कृति के प्रेमियों के लिए एक उत्तम स्थान है और अजमेर के दर्शनीय स्थल की यात्रा को और ज्ञानवर्धक बनाता है। यहाँ राजस्थान की रंगीन संस्कृति को करीब से समझा जा सकता है।
- कब जाएँ: साल के किसी भी दिन (सोमवार और सार्वजनिक अवकाश को छोड़कर)।
- क्या करें: राजस्थानी लघु चित्रों, हस्तशिल्प, पारंपरिक वेशभूषा, आभूषणों और पुरातात्विक अवशेषों का संग्रह देखें।
- जाने का सही समय: सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के बीच का कोई भी समय।
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9. अढ़ाई दिन का झोपड़ा – वास्तुकला का अद्भुत नमूना
दरगाह के नजदीक स्थित, अढ़ाई दिन का झोपड़ा एक ऐतिहासिक मस्जिद है जिसे 1199 ईस्वी में कुतुबुद्दीन ऐबक ने बनवाया था। इसका अनोखा नाम इसलिए पड़ा क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इसे बनाने में सिर्फ ढाई दिन का समय लगा था। यह हिंदू और मुस्लिम वास्तुकला का बेहतरीन संगम है। यह स्थल भारतीय इतिहास में सांस्कृतिक समामेलन का एक जीवंत प्रमाण है और अजमेर के दर्शनीय स्थल की सूची में इसका विशेष स्थान है। यहाँ के स्तंभों पर की गई अद्भुत नक्काशी देखने लायक है।
- कब जाएँ: साल के किसी भी समय, लेकिन सर्दियाँ सबसे आरामदायक होती हैं।
- क्या करें: इसकी जटिल नक्काशी और स्तंभों को निहारें, शिल्प कौशल की प्रशंसा करें और इसके इतिहास के बारे में जानें।
- जाने का सही समय: सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक। दोपहर की धूप में यहाँ की पत्थर की नक्काशी फोटोग्राफी के लिए शानदार दिखती है।
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10. किशनगढ़ – चित्रकला और चीनी मिट्टी की गुड़ियों की नगरी
अजमेर से लगभग 27 किलोमीटर दूर स्थित किशनगढ़ एक ऐतिहासिक शहर है जो अपनी विशिष्ट चित्रकला शैली ‘किशनगढ़ पेंटिंग्स’ और आकर्षक ‘किशनगढ़ चीनी मिट्टी की गुड़ियों’ के लिए विश्व प्रसिद्ध है। किशनगढ़ अजमेर की यात्रा का एक शानदार विस्तार है और यहाँ की कलात्मक विरासत इसे एक विशेष अजमेर के दर्शनीय स्थल बनाती है। बनी-ठनी के रूप में प्रसिद्ध किशनगढ़ पेंटिंग्स की नाजुक रेखाएँ दुनिया भर में प्रशंसित हैं।
- कब जाएँ: अक्टूबर से मार्च तक का समय यहाँ घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
- क्या करें: किशनगढ़ किला (फूल महल) देखें, स्थानीय बाजारों से चित्रकला और चीनी मिट्टी के बर्तन खरीदें,
- और गोंदा झील के पास समय बिताएँ।
- जाने का सही समय: पूरा दिन इस छोटे शहर को एक्सप्लोर करने के लिए पर्याप्त है।
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निष्कर्ष:
अजमेर की यात्रा सिर्फ एक धार्मिक तीर्थ यात्रा नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अन्वेषण है। यह शहर अपने आप में एक विरासत है जहाँ हर कोना एक नई कहानी कहता है। उपरोक्त सभी अजमेर के दर्शनीय स्थल इस शहर के बहुमुखी व्यक्तित्व को प्रदर्शित करते हैं – आध्यात्मिकता, इतिहास, कला और प्रकृति का अद्भुत मेल। अगली छुट्टियों में, राजस्थान के इस दिल में बसे शहर की यात्रा की योजना जरूर बनाएं और इन अद्भुत अजमेर के दर्शनीय स्थल के साक्षी बनें। आपका स्वागत है इस रंगीन और भावनात्मक यात्रा पर!
अजमेर के दर्शनीय स्थल से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs in Hindi)
उत्तर: अजमेर मुख्य रूप से सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की पवित्र दरगाह के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर: अक्टूबर से मार्च तक का समय सबसे अच्छा है क्योंकि इस दौरान मौसम सुहावना और ठंडा रहता है।
उत्तर: अजमेर और पुष्कर की मुख्य जगहें देखने के लिए कम से कम 2 दिन का समय आवश्यक है।
उत्तर: हाँ, अजमेर से पुष्कर की दूरी मात्र 15-20 किमी है, इसलिए दोनों को एक ही यात्रा में आसानी से देखा जा सकता है।
उत्तर: दरगाह पर शालीन पोशाक (ढके हुए सिर और कंधे) पहनना जरूरी है। महिलाओं के लिए दुपट्टा सिर ढकना आवश्यक है।
उत्तर: हाँ, मिलता है, लेकिन दरगाह के आसपास के क्षेत्र में और पुष्कर शहर में नॉन-वेज और शराब पर प्रतिबंध है।
उत्तर: ट्रेन द्वारा पहुँचना सबसे सुविधाजनक है, क्योंकि अजमेर जंक्शन भारत के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
उत्तर: ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और सिटी बसें आसानी से उपलब्ध हैं। प्रमुख स्थलों के लिए ऑटो-रिक्शा सबसे सुविधाजनक विकल्प है।
उत्तर: हाँ, आप प्रसिद्ध अजमेरी कढ़ाई वाले कपड़े, इत्र, चमड़े के उत्पाद और मिठाइयाँ खरीद सकते हैं।
उत्तर: नहीं, यह एक आसान से मध्यम स्तर की ट्रेक है। आरामदायक जूते पहनकर और पानी साथ लेकर जाना उचित रहेगा।